तुम हो कौन???/Tum ho Kaun??? - अभिषेक मिश्र /ABHISEKH MISHRA
एक गलती की दो बार सजा !
एक बार निचली अदालत और
दूसरी बार ऊपर सुप्रीम के द्वारा ।
लगनी चाहिए रोक ,किसी एक पर
नीचे वालों को ऊपर राहत मिलेगी ??
नीचे की जेलों में काट ली गई सजा,
ऊपर की अदालत घटाएगी ? क्या
दोबारा नए सिरे से फैसला होगा ???
अवसर कब मिलेगा सुधरने का ??
पश्चाताप का तो अवसर गया,
और होगा भी क्यों ,जब मिलेगा
अवसर स्वीकारने का
कि हां हो गई थी भूल
कि दोष था मेरा क्या
हक ये भी नहीं ,जानने का।
जब सब विधि का विधान है
फिर विधान की विधि क्यों?
रोग भी तुम्हारा और इलाज भी तुम
क्यों ? ख़्वामखाह फंस गए हैं हम
विधि भी तुम्हारी और विधान भी तुम
दूर तक कोई किरण आती नहीं नज़र
छोर भी तुम्हारा और दरिया भी तुम
अब ये क्या पागलपन है
समझ में ये बात नहीं आता हमारी
नाम जपे दिन रात तुम्हारा
बचाओगे आकर इस दलदल से
पहले ये बताओ तुम हो कौन?
~अभिषेक मिश्र
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