मैं मौत चुनूंगा (कविता) - अभिषेक मिश्र
मौत के बिस्तर पर
जीवन के आखिरी क्षण में
तुम होगी अगर आखिरी दवा,
आखिरी उम्मीद
मैं मौत चुनूंगा
हृदय जब अपनी वेदना से
हो बेताब फट जाने को
मन जब हो परेशान
तुम्हारी एक आवाज सुनने को
मैं कुछ नहीं सुनूंगा
मैं मौत चुनूंगा
इस तन्हाई को
केवल तुम भर सकती हो
याद है वो वादा
कि सदा तुम मेरी और
मैं तुम्हारा रहूंगा
तोड़ कर चली गई
सब वादे
नाम दिया इस रिश्ते को इक खेल का
सोचा भी नहीं कि
मैं इस दर्द को कैसे सहूंगा
मैं मौत चुनूंगा
- अभिषेक मिश्र
बहुत ख़ूब
ReplyDeleteVery nice 👌👍 bhai
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