मातृभाषा हिंदी की सेवा
हिंदी भाषी लोग केवल ये चाहते हैं कि हिंदी राष्ट्रभाषा हो जाए । उत्तर से लेकर दक्षिण तक , पूरब से लेकर पश्चिम तक सभी हिंदी बोलने लगें । पर उनका खुद का योगदान बस इतना है कि वे पैदा हो गए और उनके परिवार में बोली जाती थी तो वे स्वतः सीख लिए। खुद हिंदी भाषियों को ढंग से हिंदी -लिखना और पढ़ना नहीं आता और वे चाहते हैं कि भारत के अन्य राज्य ही नहीं पूरी दुनिया हिंदी पढ़ने , बोलने और समझने लगे । हिंदी की रचनाओं के प्रकाशन में अपना विशिष्ट योगदान देने वाले प्रकाशक अब दूसरे व्यवसाय के तरफ पलायन को हो रहे और बहुत तो कर चुके। हिंदी भाषियों का काम सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर रील्स और शॉर्ट पर कुमार विश्वास समान काव्य वक्ताओं से चल जा रहा , पढ़ने की आवश्यकता ही नहीं। जब आप पढ़ेंगे नहीं तो हिंदी की रचनाएं छपेंगी क्यों?
हिंदी क्षेत्र में नई संभावनाएं कैसे खुलेंगी?? नई प्रतिभाएं आगे कैसे आएंगी??
यदि आप सचमुच हिंदी को अपनी माँ समझते हैं तो उसके मान - सम्मान की रक्षा के लिए आप क्या कर रहे??
* अंतिम हिंदी की कहानी जो आपने पढ़ी हो ??
* आपका सबसे प्यारा साहित्यकार या रचनाकार कौन???
* किसकी कविताएं पढ़कर आप झूमने लगते हैं???
* किसकी कहानियां आपको लगता है समाज के सबसे निकट है ???
* कौन सी रचना जो आपके भावावेग को पथ प्रदर्शित करती है???
* वो कौन साहित्यकार है जिसे पढ़ते ही आपका रोम - रोम वीरता और साहस से भर जाता है??
* कितनी महिला रचनाकारों के नाम आपको कंठस्थ हैं???
* पिछले हफ्ते , महीने , वर्ष किस नए रचनाकार ने आपको आकर्षित किया ???
* इस समय कौन कौन से रचनाकार अपनी प्रतिभाओं से आपका मन साहित्य की तरफ खींच रहे और आपको उनमें प्रतिभाएं नज़र आ रहीं???
* किस नए रचनाकार को पढ़कर आपको अगला कबीर, अगला तुलसी , अगला सूर नजर आ रहा है??
जब आप पढ़ते हैं तब आप नए विचारों को आत्मसात कर पाते हैं न कि खीझते हैं।
तो यदि आप सचमुच में जननी हिंदी की सेवा के लिए उत्सुक हैं तो
* एक कहानी रोज़ अवश्य पढ़ें
* हर महीने या दो महीने पर एक नया उपन्यास , नाटक , एकांकी
* हर रविवार को एक निबंध आदि
बस यही कहते हुए आपसे आग्रह करूंगा कि एक कदम उठाने के लिए आपको पूरी सीढ़ी देखने की जरूरत नहीं।
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