आदिकाल -शॉर्ट नोट्स
हिंदी साहित्य : आदिकाल – माइक्रो नोट
काल-सीमा
• 1050 विक्रमी संवत से 1375 विक्रमी संवत तक (कुछ विद्वान 1000 ई . से 1400 ई. तक मानते हैं)
मुख्य विशेषताएँ
• धर्म और वीरता प्रधान साहित्य
• राजाओं की वीरता, युद्धकौशल, और चारित्रिक गुणों का वर्णन
• वीरगाथा परंपरा की स्थापना
• भाषा: अपभ्रंश मिश्रित ब्रज या पश्चिमी हिंदी
मुख्य काव्यधाराएँ
1. वीरगाथा काव्य
• चारण परंपरा से जुड़ा
• मुख्य रूप से रासो काव्य शैली में
• राजा-रजवाड़ों के युद्ध, शौर्य का वर्णन
2. प्रबन्ध काव्य
• गद्य-पद्य मिश्रित
• ऐतिहासिक व धार्मिक घटनाओं का वर्णन
प्रमुख रचनाएँ व रचनाकार
• पृथ्वीराज रासो – चंदबरदाई
• हम्मीर रासो – जोधराज
• बीसलदेव रासो – नरपति नाल्ह
• पृथ्वीराज विजय – जयानक
आदिकालीन जैन - ग्रंथाकार एवं उनकी रचनाएं :
वीरगाथाकालीन रचनाएँ एवं उनके रचनाकार :
भाषा शैली
• प्रमुख रूप से अपभ्रंश और ब्रज मिश्रित हिंदी
• तत्सम शब्दों की अधिकता
• पद्य रूप में रचना, दोहा-चौपाई छंदों का प्रयोग
महत्वपूर्ण बिंदु (MCQ Focus)
• आदिकाल को वीरगाथा काल भी कहते हैं
• पृथ्वीराज रासो का मूल रूप लघु था, बाद में वृद्धि हुई
• रचनाएँ राजाश्रयी कवियों द्वारा रची गईं
• चारण, भाट और जैन कवियों की महत्वपूर्ण भूमिका
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