एक नार ने अचरज किया, साँप मार पिंजरे में दिया।

एक नार ने अचरज किया,
 साँप मार पिंजरे में दिया। 
ज्यों-ज्यों साँप ताल को खाए, 
सूखै ताल साँप मरि जाए ॥

                             ~दीये की बत्ती

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