मौन (कविता)/ अभिषेक मिश्र

 शब्द से परे , बात जग के सार की,

अंतः जगत की , मन के व्यवहार की,

धैर्य की , प्रलय की , आनंद समाधि की,

मौन उद्घोषणा है, विकराल नाद की।


                  ~अभिषेक मिश्र

Comments

  1. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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