कवि सेवक बूढ़े भए तौ कहा पै हनोज है मौज मनोज ही की

" कवि सेवक बूढ़े भए तौ कहा पै हनोज है मौज मनोज ही की"

- सेवक जी कहते हैं कि बूढ़े हो गए हैं तो क्या हुआ अभी भी कामदेव की ही मौज है

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