चलिअ वीर हम्मीर पाअभर मेइणि कंपई

 चलिअ वीर हम्मीर पाअभर मेइणि कंपई ।

दिगमग णह अंधार धूलि सुररह आच्छाइहि ॥

पाअभर = पाँव / चरणों के भार से ।
मेइणि = पृथ्वी / धरती ।
कंपइ = काँपती है ।
दिगमग = दिग अर्थात् दिशा और मग अर्थात् मार्ग / रास्ता ।
णह = आकाश / आसमान ।
अंधार = अंधेरा
धूलि = धूल , मिट्टी ,गर्दा, धूर ।
सुररह = सूर्य - रथ
आच्छाइहि = आच्छादित अर्थात् ढँक लेती है।



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