थावर जंगम कीट पतंगा पूरि रह्यो हरिराई ।

 थावर जंगम कीट पतंगा पूरि रह्यो हरिराई ।

यह पंक्ति भक्ति के अद्वैत दर्शन का सुंदर उदाहरण है, जिसमें संत ईश्वर की सर्वव्यापकता का वर्णन करते हैं।

पंक्ति का अर्थ:

 "थावर (स्थिर, जैसे पेड़-पौधे),
 जंगम (चलने वाले, जैसे मनुष्य, जानवर),
 कीट (छोटे जीव), 
पतंगा (कीट-पतंगे)—हर जगह भगवान ही व्याप्त हैं।"



इस पंक्ति में संत यह कहना चाहते हैं कि ईश्वर हर जीवित और निर्जीव वस्तु में समाए हुए हैं। चाहे वह स्थिर पेड़-पौधे हों, चलते-फिरते प्राणी हों, या फिर छोटे-छोटे कीट-पतंगे हों—हर जगह ईश्वर की शक्ति और उपस्थिति विद्यमान है।

इस विचार में संत रविदास का संदेश है कि सृष्टि में हर वस्तु में परमात्मा का निवास है और इसीलिए सभी का आदर करना चाहिए, क्योंकि सभी में ईश्वर की छवि है। यह विचार हमें संपूर्ण सृष्टि के प्रति प्रेम और करुणा की भावना सिखाता है।


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