आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के विचार की असली पुस्तक किसे कहते हैं

 "जिस पुस्तक से यह उद्देश्य सिद्ध नहीं होता , जिससे मनुष्य का अज्ञान , कुसंस्कार और अविवेक दूर नहीं होता , जिससे मनुष्य शोषण और अत्याचार के विरुद्ध सिर उठाकर खड़ा हो नहीं जाता , जिससे वह छीना-  झपटी , स्वार्थपरता और हिंसा के दलदल से उबर नहीं पाता , वह पुस्तक किसी काम की नहीं है ।"

                          - हजारी प्रसाद द्विवेदी

Comments

  1. अत्यंत मनमोहक प्रस्तुति है आप की आप को ये पेज बनाने के लिए तहे दिल से आभार।

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