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लिपि /SCRIPT (स्क्रिप्ट)

 मौखिक भाषा की लिखित अभियुक्तों के लिए प्रयुक्त ध्वनि चिह्नों को लिपि  कहते हैं।

चन्द्रदेव से मेरी बातें: राजेंद्र बाला घोष

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चन्द्रदेव से मेरी बातें: राजेंद्र बाला घोष भगवान चन्द्रदेव! आपके कमलवत् कोमल चरणों में इस दासी का अनेक बार प्रणाम। आज मैं आपसे दो चार बातें करने की इच्छा रखती हूँ। देखो, सुनी अनसुनी सी मत कर जाना। अपने बड़प्पन की ओर ध्यान देना। अच्छा, कहती हूँ, सुनों। मैं सुनती हूँ, आप इस आकाश मंडल में चिरकाल से वास करते हैं। क्या यह बात सत्य हैं? यदि सत्य है, तो मैं अनुमान करती हूँ कि इस सृष्टि के साथ ही साथ अवश्य आपकी भी सृष्टि हुई होगी। तब तो आप ढेर दिन के पुराने, बूढ़े कहे जा सकते हैं। यह क्यों? क्या आपका डिपार्टमेण्ट (महकमे) में ट्रांसफ़र (बदली) होने का नियम नहीं हैं? क्या आपकी ‘गवरमेण्ट’ पेंशन भी नहीं देती? बड़े खेद की बात हैं? यदि आप हमारी न्यायशीलता ‘गवर्नमेण्ट’ के किसी विभाग में सर्विस (नौकरी) करते होते तो अब तक आपकी बहुत कुछ पदोन्नति हो गई होती। और ऐसी ‘पोस्ट’ पर रहकर भारत के कितने ही सुरम्य नगर, पर्वत जंगल और झाड़ियों में भ्रमण करते। अंत में इस वृद्ध अवस्था में पेंशन प्राप्त कर काशी ऐसे पुनीत और शान्ति-धाम में बैठकर हरी नाम स्मरण करके अपना परलोक बनाते। यह हमारी बड़ी भारी भूल हुई। भगवान चंद्र...