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कीर्तिलता मंगलाचरण

पितरूपनय मह्यं नाकनद्या मृणालं      नहि तनय मृणालः किंत्वसौ सर्पराजः।

M.A ( Hindi ) syllabus VBSPU / प्रथम वर्ष - सेमेस्टर vii / प्रथम प्रश्न पत्र / आदिकालीन काव्य

प्रथम प्रश्न पत्र / आदिकालीन काव्य  इकाई 1 : - नामकरण , परिस्थितियॉं ( राजनीतिक , सामाजिक , धार्मिक , सांस्कृतिक ) , प्रवित्तियाँ , साहित्यिक रूप ( सिद्ध , नाथ , रासो , जैन , लौकिक ) इकाई 2 :- सरहपा :  व्यक्तित्व एवं कृतित्व , काव्यगत विशेषताएं , भाषा ।  ( 10 दोहे ) इकाई 3 :- गोरखनाथ : व्यक्तित्व एवं कृतित्व , नाथपंथ , नाथपंथ की विशेषताएँ , हठयोग साधना । ( 10 पद ) इकाई 4 :- विद्यापति : जीवन -वृत्त , कृतियाँ , भक्त कवि अथवा श्रृंगारिक कवि , विद्यापति एवं अवहट्ट , पदावली  व कीर्तिलता का काव्य वैशिष्ट्य , वर्ण - विषय तथा भाषा । ( पदावली - 10 पद , कीर्तिलता - 10 पद ) इकाई 5 :- चन्दबरदाई : जीवन-वृत्त , पृथ्वीराज रासो की प्रामाणिकता , रासो के संस्करण , रासो की भाषा ।  ( पृथ्वीराज रासो - रेवातट समय ) पुस्तक :- आदिकालीन काव्य (एम.ए. प्रथम वर्ष ) प्रथम सेमेस्टर , विमल प्रकाशन Join whatsapp group for more updates : https://chat.whatsapp.com/CYKCuOOEaK76QABjU9bbxZ

रीतिसिद्ध कवि बिहारी के काव्यसौष्ठव पर प्रकाश डालिये।

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बूढ़ी काकी (कहानी ) - मुंशी प्रेमचंद

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  बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिह्वा - स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही। समस्त इन्द्रियाँ, नेत्र, हाथ और पैर जवाब दे चुके थे। पृथ्वी पर पड़ी रहतीं और घर वाले कोई बात उनकी इच्छा के प्रतिकूल करते, भोजन का समय टल जाता या उसका परिमाण पूर्ण न होता, अथवा बाजार से कोई वस्तु आती और उन्हें न मिलती तो वे रोनें लगती थीं। उनका रोना सिसकना साधारण रोना न था, वे गला फाड़- फाड़कर रोती थीं।               उनके पतिदेव को स्वर्ग सिधारे कालांतर हो चुका था । बेटे तरुण हो-हो कर चल बसे थे। अब एक भतीजे के सिवाय और कोई न था। उसी भतीजे के नाम उन्होंने अपनी सारी संपत्ति लिख दी। भतीजे ने सारी संपत्ति लिखाते समय खूब लम्बे-चौड़े वादे किए, किन्तु वे सब वादे केवल कूली डिपो के दलालों के दिखाए हुए सब्जबाग थे। यद्द्यपि उस सम्पत्ति की वार्षिक आय डेढ़-दो सौ रुपये से कम न थी तथापि बूढ़ी काकी को पेट भर भोजन भी कठिनाई से मिलता था। इसमें इनके भतीजे का   अपराध था अथवा उनकी अर्धांगिनी...