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आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के विचार की असली पुस्तक किसे कहते हैं

 "जिस पुस्तक से यह उद्देश्य सिद्ध नहीं होता , जिससे मनुष्य का अज्ञान , कुसंस्कार और अविवेक दूर नहीं होता , जिससे मनुष्य शोषण और अत्याचार के विरुद्ध सिर उठाकर खड़ा हो नहीं जाता , जिससे वह छीना-  झपटी , स्वार्थपरता और हिंसा के दलदल से उबर नहीं पाता , वह पुस्तक किसी काम की नहीं है ।"                           - हजारी प्रसाद द्विवेदी

सिद्धान्त - आचार्य

         सिद्धान्त                      आचार्य     1.  रस                             भरतमुनि     2.  छंद                             पिंगल     3.  अलंकार                       भामह     4.  ध्वनि                           आनन्दवर्धन     5.   वक्रोक्ति                       कुंतक     6.  औचित्य                        क्षेमेन्द्र

मैंने उसको जब - जब देखा...

मैंने उसको जब-जब देखा लोहा देखा, लोहा जैसे तपते देखा , गलते देखा, ढलते देखा मैंने उसको गोली जैसे चलते देखा।